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| छवि श्रेय: गूगल |
कविताएँ लिखनी चाहिए
जैसा कि एक कवि कहता है कि मातृभाषा में ही लिखी जा सकती है कविता
तो मातृभाषा को याद रखने के लिए लिखी जानी चाहिए कविता
और इसलिए भी कि यह समझ धुँधली न हो
कि पिता पहला तानाशाह होते हैं
और जैसा कि मैं कह गया हूँ माँएँ पहला कम्युनिस्ट
पड़ोसियों ने फ़ासिस्ट न होने की गारंटी कभी नहीं दी
इलाहाबाद से दिल्ली के सफ़र के शुरू में
एक आदमी ने सीट को एक्सचेंज करने का प्रस्ताव रखा
फिर उसने कहा कि और क्या एक्सचेंज किया जा सकता है
मैंने कहा कि मैं किसी को अपना कोहराम नहीं देने वाला
जाते-जाते वह कह गया कि झूठ पर फ़िल्म बनाने के बहुत पैसे मिलते हैं
मैंने ग़ायब होने के पहले कहा
कि जो संरक्षण संविधान में कवि को मिलना चाहिए था वह गाय को मिल गया
पान खाते हुए वह हँस पड़ा और उसका सारा थूक मेरे मुँह पर पड़ गया
कविताएँ लिखनी चाहिए ताकि कवि नैतिक अल्पसंख्यक न रह जाएँ
कविताएँ लिखी जानी चाहिए ताकि मुक्केबाज़ के तौर पर मोहम्मद अली की याद रहे
और देश के तौर पर वियतनाम की
और बसने के लिए फ़िलिस्तीन से बेहतर कोई देश न लगे
और वेमुला होना सबसे ज़्यादा मनुष्य होना लगे
कविताएँ लिखनी चाहिए क्योंकि ऋतुओं और बहनों के बग़ल से गुज़रने को
कविताएँ ही रजिस्टर करती हैं और पत्तों और आदमी के गिरने को
कविताएँ लिखी जानी चाहिए क्योंकि कवि ही करते हैं वापस पुरस्कार
और उन्हें ही आती है अख़लाक़ पर कविताएँ लिखते हुए रो पड़ने की अप्रतिम कला
बर्बरता का समान वितरण
राज्य
संविधान के नीति निर्देशक तत्त्वों के अनुरूप
आय का समान वितरण न कर सका
तो उसने क्रूरता का समान वितरण कर दिया
जो मुझे सड़क पर मारने आता है वह कुछ वैसा ही बर्बर है
जो मुझे नहीं बचाता वह अधिक बर्बर है
मेरे पास वहाँ से निकल भागने की कातर हिंसा है मैं उसका इस्तेमाल शायद अपनी स्त्री के विरुद्ध करूँगा
पारस्परिक क्रूरता की यह बहुत लंबी रात है जहाँ
नागरिकता नहीं राज्य का कोई तिलिस्मी स्थापत्य सुरक्षित है
हिंदी के सुपरिचित कवि-लेखक। काव्य के विविधता में पारंगत एवं भारत भूषण अग्रवाल सम्मान से सम्मानित।

