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| छवि श्रेय: अंतरा श्रीवास्तव |
अधूरापन
अधूरापन
ईंधन है जीवन का,
पूर्णता की परिपूर्णता तो
रिक्त कर जाती है
खुलने वाले बहुआयामी
अंतर्मन के अंतरिक्षों को,
तभी पृथ्वी जी रही है
आधे सच से,
आधे झूठ ने मजबूती से,
पकड़ रखा है धुरी को,
जिस दिन पूरे सच ने छू लिया
धम्म से गिर जाएगी बीचोंबीच ब्रम्हांड के।
चल रही है सृष्टि
योगियों के आधे खुले नेत्र से,
आधी खुली ईश्वर की हथेली से,
आधे खुले प्रेमियों के होंठ से,
स्वप्नों के अधूरेपन से।
आधा दिन-आधी रात,
स्मरण करवाया करते हैं,
अधूरेपन की वास्तविकता
शब्दों के अधूरेपन की दरार से ही,
पनपती है उत्कंठा
अमर हो जाया करती हैं अक्सर,
अधूरी कहानियाँ
अधूरापन खींचता है
और सींचता भी है जीवन को!
"अधूरापन ईंधन है जीवन का, पूर्णता की परिपूर्णता तो रिक्त कर जाती है, खुलने वाले बहुआयामी अंतर्मन के अंतरिक्षों को। तभी पृथ्वी जी रही है, आधे सच से, आधे झूठ ने मजबूती से, पकड़ रखा है धुरी को, जिस दिन पूरे सच ने छू लिया, धम्म से गिर जाएगी बीचोंबीच ब्रम्हांड के."
बस वहीं मिलूँगी
इक दिन
जब कभी मैं गुम हो जाऊं
ढ़ूंढने तो मुझे तुम आओगे न फिर?
ठिकानें तो मेरे सारे पता हैं तुम्हें
गंगा के मुहाने पर
उन बर्फीले पहाड़ों के पास
गहरे अरण्य में
जहां चांदनी रातों में
हम बातें किया करते थे
घंटों तक बिना कुछ कहे
सितारों की तरह
उनकी भाषा जो सीख ली थी हमनें
और जंगल के आर्किड की तरह जीना
कैसे भी कहीं भी बस खिल जाना
और वह नन्ही सी नीली चिड़िया
जब रस पीने आती थी
मैं उसी में समा जाया करती थी
देर तक आसमां को करीब से देखती
उसका नीलापन दिल में समेट लेती
तुम्हें याद है लुकाछिपी में
मैं अक्सर नदी बन जाया करती
तुम समंदर बन कहीं दूर छुप जाते थे
न जाने कितनी कंदराओं को पार कर
तुम्हें ढूढ़ती दूर निकल जाया करती थी
तुम खामोशी से मुझे देखा करते
खूब सताया करते थे
तुम्हे पता था मैं तुम तक ही पहुँचूंगी
तो खो जाऊँ न जिस दिन
जी लेना उन पलों को
गौर से सुनना धड़कनों को अपनी
वहीं....बस वहीं मिलूंगी मैं!
"तुम्हें याद है लुकाछिपी में, मैं अक्सर नदी बन जाया करती, तुम समंदर बन कहीं दूर छुप जाते थे। न जाने कितनी कंदराओं को पार कर, तुम्हें ढूढ़ती दूर निकल जाया करती थी। तुम खामोशी से मुझे देखा करते, खूब सताया करते थे, तुम्हें पता था मैं तुम तक ही पहुँचूंगी."
कुछ औरतें
कुछ औरतें
जन्मती हैं नीले दिल लिए
वही जो बंजारों के पास होता है
फ़कीरों सा बेपरवाह मुक्त।
चिड़ियों की तरह बना लेती हैं
घोंसला कहीं भी,
चीजों से ज़्यादा यादें सहेजने वालीं,
ज़िन्दगी के हर रेशे से प्रेम करती,
पक्षियों के टूटे पंख चुना करती,
वृक्षों की भाषा समझने वाली,
कविताओं में जिया करती हैं,
हृदय की नीलिमा अक्सर,
आंखों मे उतर आती है,
आस-पास तैरने लगते हैं,
उसके अपने गुलाबी बादल,
खुद की आकाशगंगा ,
बनाने में माहिर है कमबख्त।
दुनिया बड़ी खीजती है,
उसके नीले दिल को कमज़ोर बताती है,
और करती है
धमनियों में लाल रंग
भरने की कोशिश,
लाल रंग नीले में बदल जाता है,
बाकी जीवों की तरह
उसकी जगह बन जाती है
ठंडा नीलापन उबलते दिलों को
ठंडक देने लगता है!
"कुछ औरतें जन्मती हैं नीले दिल लिए, वही जो बंजारों के पास होता है, फ़कीरों सा बेपरवाह मुक्त। चिड़ियों की तरह बना लेती हैं घोंसला कहीं भी."
मिलन
मिलने का जब भी तुम्हें
जी करे मुझसे
आ जाया करना इसी पन्ने पर
हर शब्द की श्वास पर मिलूंगी,
थक जाओ जब कभी
ज़िंदगी की भाग दौड़ से
रुक जाना मेरी इबादत की पनाह में
सुकून की देहरी सजा कर
यादों की ओस से
थोड़ी नमी बचा ली है
तुम्हें छू कर शब्दों में उतारा है
पड़ेंगी जब निगाहें उन पर
ख़्यालों में तुम्हारी उतर जाऊंगी
सिर्फ तुम्हारे लिए मैं फिर आउंगी!
"मिलने का जब भी तुम्हें जी करे मुझसे, आ जाया करना इसी पन्ने पर, हर शब्द की श्वास पर मिलूंगी"
समकालीन चित्रकार अंतरा श्रीवास्तव, अंग्रेजी में विशिष्टता के साथ स्नातक हैं और देश विदेश के विभिन्न हिस्सों में दो दशकों से अधिक समय से अनेकों एकल व समूह प्रदर्शनियां कर रहीं हैं। समकालीन कलाजगत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायी है। आर्ट शौपिंग के तहत लूवर म्यूजियम, पेरिस और आर्ट मोनैको, फ्रेंच रिवियेरा में अंतरराष्ट्रीय गैलरिस्ट मोना यूसुफ गैलरी द्वारा चयनित और प्रायोजित प्रदर्शनी।
इनकी रचनाएँ विभिन्न प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं हैं और अंग्रेजी एन्थोलौजी फ्रजाइलिटी दाइ नेम इज़ नौट वूमन की भी हिस्सा रहीं हैं।
अमेरिकी लेखिका ऐना एरिश्किगल के अंग्रेजी उपन्यास 'ए गौथिक क्रिसमस एंजल' का हिंदी अनुवाद। ख्यातिलब्ध इराकी कवि अनवर घानी के सहभागिता से उनकी मोज़ेक स्टाइल कविता और इनकी कलाकृतियों की पुस्तक पोएटिक पैलेट प्रकाशित। कविता संग्रह 'मन पाखी : ख़्वाब आसमां हाल ही मे प्रकाशित।
हिन्दी व अंग्रेजी भाषा और साहित्य में गहरी रुचि। एमेजॉन पर अनुवादक और शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम में प्रवीण।
Collections:
Her works are in collection of Director Anurag Kashyap, Actor and social influencer Anushka sen, various embassies, several VIP Army Messes, Royal Itarana Palace [Alwar], various senior Army/ Govt /corporates/business owners private collections in India and abroad.

