बर्फ गिरने दो

बर्फ गिरने दो
(अमेरिकी कहानी - 2003 में दि न्यूयार्कर में प्रकाशित): डेविड सेडारिस

हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह


    उत्तरी कैरोलाइना में सर्दियाँ निराशाजनक रूप से हल्की हुआ करती हैं किंतु जिस वर्ष मैं पाँचवी कक्षा में था हम सौभाग्यशाली रहे। बर्फ पड़ी और कई सालों में पहली बार इकट्ठी भी हो गयी। स्कूल बंद हो गए और दो दिन बाद हमारा सौभाग्य फिर लौटा। जमीन पर आठ इंच बर्फ पड़ी और पिघल जाने की बजाय जमीन पर जम गई। हमारी छुट्टियों के पांचवें दिन मेरी माँ ब्रेकडाउन का शिकार हो गयी। हमारी लगातार उपस्थिति ने उनके गुप्त जीवन को, जो वह हमारे स्कूल चले जाने के बाद जीती थी, अस्त व्यस्त कर दिया था और जब वह अधिक नहीं बर्दास्त कर सकी तो उसने हमें घर से बाहर निकाल दिया। यह कोई विनम्र अनुरोध नहीं था बल्कि कुछ कुछ  जबरदस्ती घर खाली कराने जैसा था। उसने कहा "मेरे घर से बाहर निकल जाओ।"

    हमने उसे याद दिलाया कि यह हमारा भी घर है पर उसने दरवाजा खोला और हमें कार पार्किंग में धकेल दिया। "यहीं बाहर रहो," वह चिल्लाई।

    मेरी बहनें और मैं पास की पहाड़ी पर चले गए और पड़ोस के अन्य बच्चों के साथ बर्फ पर फिसलने का खेल खेलने लगे। कुछ घंटों बाद हम वापस लौटे और यह देख कर आश्चर्यचकित रह गए कि मुख्य द्वार का ताला बंद था। "अरे आओ भी," हमने कहा। मैंने दरवाजे की घंटी कई बार बजाई और जब किसी ने जवाब नहीं दिया तो हम खिड़की में से झाँकने लगे। हमने देखा कि हमारी माँ किचन टेबल के पास बैठी टेलीविजन देख रही थी। सामान्यतः वह ड्रिंक लेने के लिए शाम के पाँच बजने की प्रतीक्षा करती थी लेकिन पिछले कुछ दिन अपवाद थे। पीने की तब कोई गिनती नहीं होती जब आप एक ग्लास वाइन पीने के बाद एक कप कॉफी ले लें। इसलिए उसने टेबल पर एक प्याला और एक मग अगल बगल रखा हुआ था।

    "हे! दरवाजा खोलो," हम चिल्लाए। "दरवाजा खोलो, हम हैं।" हमने खिड़की का काँच भी पीटा। बिना हमारी ओर देखे उसने अपना प्याला भरा और कमरे से उठ कर चली गयी।

    "डायन" मेरी बहन चिल्लाई। हमने बार बार दरवाजा पीटा और जब हमारी माँ की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो हम उसके बेडरूम की खिड़की पर बर्फ के गोले फेंकने लगे। "जब डैडी आएँगे तो तुम्हारी अच्छी खबर लेंगे," हम चिल्लाए और जवाब में हमारी माँ ने खिड़की के पर्दे खींच दिए। साँझ होने लगी थी और हमें लगा कि अब हम मरने वाले हैं। यह पहले भी हुआ है, निश्चित रूप से। स्वार्थी माँएं घर में अकेले रहना चाहती थी और बाद में उनके बच्चे कई वर्षों बाद किसी लुप्त हो चुके प्राणी की भांति बर्फ में जमे हुए पाए गए थे।

    मेरी बहन ग्रेचेन ने सुझाव दिया कि हमे डैडी को फोन करना चाहिए, लेकिन हम में से किसी को उनका नंबर नहीं पता था। और वे शायद कुछ करते भी नहीं। वे काम पर गए थे, विशेष रूप से हमारी माँ से दूर जाने के लिए। मौसम और उसके मूड के बीच में घंटों या दिनों का अंतराल भी हो सकता था जब तक वे घर लौटते।

    "हम में से किसी एक को कार से टक्कर लगनी चाहिए," मैंने कहा। "इससे उन दोनों को सबक मिलेगा।" मैंने ग्रेचेन के सामने तस्वीर खींची कि उसका जीवन एक धागे से लटका हुआ है और हमारे माँ बाप रेक्स अस्पताल के हाल में यह सोचते हुए इधर उधर बेचैन टहल रहे हैं कि उन्हें बच्चों पर अधिक ध्यान देना चाहिए था। यह समस्या का एकदम पक्का हल था। ग्रेचेन के हमारे बीच से चले जाने के बाद, हमारी भी कीमत बढ़ जाएगी और हमें पसरे रहने के लिए घर में अधिक जगह मिल जाएगी। "ग्रेचेन जाओ सड़क पर लेट जाओ।" मैंने कहा।

    "यह करने के लिए एमी को कहो," उसने कहा।

    एमी ने अपनी बारी आने पर मामला टिफनी की ओर ठेल दिया। टिफनी जो सबसे छोटी थी और अभी मृत्यु के विचार से अवगत न थी। "यह बस सोने जैसा ही है," हमने उसे कहा। "बस तुम्हारा बेड दूसरे तरह का होगा।"

    बेचारी टिफनी। वह थोड़े से स्नेह के एवज में कुछ भी कर सकती थी। आपको बस उसे टेफ़ कह कर पुकारना भर था और उसकी हर चीज आपकी थी: उसकी पॉकेट मनी, उसका डिनर, उसका क्रिसमस का उपहार, सब। किसी को खुश करने की उसकी उत्सुकता एकदम स्पष्ट थी। जब हमने उससे सड़क पर लेट जाने को कहा तो उसका एक मात्र प्रश्न था "कहाँ?"

    हमने दो पहाड़ियों के बीच एक ढ़लाननुमा जगह चुनी जहाँ ड्राइवर लगभग हमेशा नियंत्रण खो देते थे। वह अपनी जगह पर लेट गयी, अपना क्रीम कलर का कोट पहने छः साल की बेचारी टिफनी। हम मोड़ पर आगे की घटना देखने के लिए इकट्ठा हो गए। जो पहली कार आयी वह पीले रंग की, हमारे एक पड़ोसी की कार थी। वह जोर से ब्रेक लगाने के कारण कुछ फीट पहले ही रुक गयी। "क्या यहाँ कोई आदमी है?" उसने पूछा।

    "हाँ, ऐसा ही कुछ है," लीसा ने कहा। उसने उसे बताया कि हमें घर से बाहर निकाल दिया गया है। यद्यपि यह लगा कि उस आदमी ने इसे एक उचित स्पष्टीकरण के रूप में स्वीकार कर लिया था लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि उसी ने घर जा कर हमारी चुगली की थी। एक और कार गुजर गई और तभी हमने अपनी माँ को देखा। एक फूला हुआ आकार मुश्किल से पहाड़ी की चढ़ाई चढ़ता हुआ। वह फुलपैंट नहीं पहने थी और उसके पैर टखनों तक बर्फ में धंसे जा रहे थे। हम उसे घर वापस भेज देना चाह रहे थे। उसे प्रकृति से उसी तरह बाहर कर देना चाह रहे थे जैसे उसने हमें घर से बाहर निकाल दिया था। किन्तु उसके जैसी दयनीय हालत में किसी को देख कर नाराज रह पाना बहुत कठिन था।

     "क्या तुम अपने जूते पहने हुए हो?" लीसा ने पूछा और जवाब में हमारी माँ ने अपना नंगा पैर ऊपर उठा दिया।
    
     "मैं जूते पहने हुए थी," उसने कहा "मैं सच कह रही हूँ, कुछ सेकेंड पहले तक वे मेरे पैरों में ही थे।"

    तो चीजें इस तरह घटित हुई। एक क्षण पहले वह हमें हमारे ही घर से बाहर निकाल चुकी थी और अब हम शोर करते हुए बर्फ में उसका खोया हुआ जूता ढूढ़ रहे थे। "अरे छोड़ो उसे," उसने कहा "कुछ दिन में वह खुद ही मिल जाएगा।" 

    ग्रेचेन ने अपनी टोपी माँ के पाँव में फिट कर दी। लीसा ने अपने स्कार्फ से उसे चारो तरफ से कस कर उसके पाँव में बांध दिया। उसे चारो ओर से घेरे हुए हम घर की ओर वापस जा रहे थे।



श्रीविलास सिंह 
A-5 आशीष रॉयल टावर 
बीसलपुर रोड 
बरेली -243006

परिचय:

जन्म 05 फरवरी, 1962 को मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश में। शिक्षा इलाहाबाद विश्व विद्यालय से। संप्रति केंद्र सरकार की सेवा में बरेली में कार्यरत।