हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह



अब्बास कियारोस्तमी
(फारसी से अनुवाद: करीम इमामी और माइकल बीयर्ड)
हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह


1.

एक भूखा भेड़िया
बर्फ में
एक भेड़
सो रही अपने बाड़े में
एक कुत्ता
रखवाली कर रहा बाड़े के द्वार पर।


2.

मेरे मस्तिष्क में 
है एक वृक्ष
जिसके फल
लूट लिए जाते हैं
सूर्योदय होने पर।


3.

एक तारकविहीन रात्रि में
मैं उतरता हूँ एक कुंए में
जो ले जाता है मुझे
अपनी तलहटी में
एक पाँच पंखुड़ियों वाले श्वेत पुष्प तक।


4.

जीवन 
एक अन्यायपूर्ण अपयश
गरीबों के लिए।


5.

मेरे जीवन में 
दुर्घटनाओं की भूमिका
रही है अधिक प्रभावी
बनिस्पत निर्णयों के।
सजा की भूमिका
अधिक महत्वपूर्ण उत्साहवर्धन से।
भूमिका दुश्मनों की
रही है अधिक दोस्तों की भूमिका से।


6.

दफ़्न करो मेरे हृदय को
अलग कहीं
यह है बहुत नाजुक।


7.

सफेद बर्फ पर एक रक्तिम बिंदु रेखा
घायल शिकार
दूर जाता लंगड़ाता हुआ।


8.

पूरा चाँद
प्रतिबिंबित है जल में
जल
है कटोरे में
और प्यासा आदमी 
गहरी नींद में।


9.

चाँदनी
चमक रही एक संकरे रास्ते पर
जिस पर नहीं जाऊँगा मैं।


10.

मेरा आधा
तुम्हारा है,
शेष आधा
मेरा है।


11.

खिड़की का एक पक्ष
देखता है मुझे,
दूसरा पक्ष
आने जाने वालों को।


12.

मैं सोच रहा हूँ व्यक्त करने को कुछ 
जो किया नहीं जा सकता व्यक्त;
कितना उबाऊ है सुनना
कुछ ऐसा जिसे तुम जानते हो पहले से ही।


13.

मैं डरता हूँ ऊंचाइयों से;
मैं गिर चुका हूँ एक ऊंचे स्थान से।
मैं डरता हूँ आग से;
मैं जल चुका हूँ कई कई बार।
मैं डरता हूँ अलगाव से;
अक्सर चोट खाता रहा हूँ मैं।
मैं डरता नहीं हूँ मौत से
मैं नहीं मरा हूँ पहले कभी
एक बार भी नहीं।


14.

मैं दिव्य कर देता हूँ
मृगमरीचिका की गहराई को
अपनी प्यास की मात्रा से।


15.

मेरा यह दिन भी
खो गया
अन्य तमाम दिनों की भांति,
आधा बीते कल के बारे में सोचते हुए,
शेष आधा आने वाले कल के बारे में।


16.

अच्छाई और बुराई से परे
आकाश है
नीला।


17.

यह राह
त्यागी जा चुकी है
अनेक वर्षों पूर्व
यद्यपि लगता नहीं कि जानते हैं यह बात
हवा के पुष्प।


18.

मेरे जीवन के शब्दकोष में
बदलती रहती है परिभाषा
प्रेम की।


19.

मैंने नोट की एक कालजयी कविता
अपनी डायरी में
रात्रि के मध्य में,
जब आयी सुबह
यह नहीं थी लफ्फाजी से कुछ अधिक।


20.

कितना दयनीय है
कि नहीं हूँ मैं अच्छा मेजबान 
उन हिमकणों के लिए
जो ठहर गए मेरी पलकों पर।


21.

सुबह है शुभ्र
संध्या है कालिमामय
एक धूसर शोक है
इन दोनों के मध्य।


22.

एक भेड़िया
बैठा है प्रतीक्षारत।


23.

उड़ान है पुरस्कार एक तितली का
जो लपेट लेती है स्वयं को
रेशम के कोकून में।


24.

एक बवंडर ने
पलट दी चरवाहे की केतली
जो रखी थी एक पहाड़ी की चोटी पर।


25.

एक युवा चाँद
एक पुरानी शराब
एक नया दोस्त।
एक सेब गिरा पेड़ से
और मैंने सोचा
सेब के आकर्षण के बारे में।


अन्य रचनाएँ: 

श्रीविलास सिंह (समकालीन कवि, लेखक, अनुवादक)
A-5 आशीष रॉयल टावर 
बीसलपुर रोड 
बरेली -243006

परिचय:

जन्म 05 फरवरी, 1962 को मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश में। शिक्षा इलाहाबाद विश्व विद्यालय से। संप्रति केंद्र सरकार की सेवा में बरेली में कार्यरत।